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दिवाली सजावट की तैयारी
दीये, रंगोली, लाइट्स और पूजा की सजावट का सामान पहले से प्लान करें।
करवा चौथ उत्तर भारत की विवाहित महिलाओं द्वारा बड़ी श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें पूरे दिन बिना अन्न-जल के व्रत रखकर पति की दीर्घायु और कल्याण की कामना की जाती है। शाम को गौरी माँ, भगवान शिव, गणेश जी और कार्तिकेय जी की पूजा की जाती है, और फिर छलनी से चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। सूर्योदय से पहले खाई जाने वाली सरगी से लेकर शाम की पूजा के लिए करवा, छलनी और पूजा थाली तक — हर चीज़ पहले से तैयार रखना बेहतर रहता है, ताकि पूजा के दिन आखिरी समय की भागदौड़ न हो। हमने यह सम्पूर्ण करवा चौथ पूजा सामग्री चेकलिस्ट तैयार की है, ताकि आप श्रद्धा और सहजता से अपनी पूजा की तैयारी कर सकें। नीचे दिए लिंक्स से कीमतें देखें और ज़रूरी सामान पहले से ही ऑर्डर कर लें।

करवा चौथ की शाम की पूजा के लिए ज़रूरी मुख्य सामग्री — करवा से लेकर दीया और पूजा थाली तक। सामान देखें →
सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है और वायना सम्मान स्वरूप दी जाती है — करवा चौथ के व्रत का भोजन और भेंट से जुड़ा हिस्सा। सामान देखें →
• जरूरत का सामान चुनकर अपनी व्यक्तिगत लिस्ट तैयार करें। • जरूरत के अनुसार उपलब्ध फ़िल्टर का उपयोग करके सामान आसानी से खोज सकते हैं। • मात्रा, यूनिट और उपलब्ध होने पर पसंदीदा ब्रांड अपनी जरूरत के अनुसार चुनें। • पूरी लिस्ट को कभी भी देखें, अपडेट करें और जरूरी सामान छूटने से बचें। • लिस्ट को परिवार के सदस्यों या दुकानदार के साथ आसानी से साझा करें। • इस पेज के नीचे उपलब्ध FAQs और संबंधित लिस्ट भी देख सकते हैं।
क्या इस लिस्ट से आपको अपनी तैयारी में कुछ मदद मिली?
ज़रूरी सामान में करवा (टोंटी वाला सजा हुआ पात्र), चंद्र दर्शन के लिए छलनी, गौरी माँ की मूर्ति या चित्र, व्रत कथा पुस्तक, दीया, कुमकुम, चंदन, अक्षत और पूजा थाली शामिल हैं। सरगी की सामग्री (फल, मेवे, मिठाई) एक शाम पहले तैयार रखें, क्योंकि सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है।
सरगी सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला भोजन है, जो परंपरागत रूप से सास द्वारा व्रत रखने वाली बहू को दिया जाता है। इसमें आमतौर पर फल, मेवे, मिठाई और मठरी जैसी नमकीन चीज़ें शामिल होती हैं।
करवा चौथ की पूजा गौरी माँ (माता पार्वती का स्वरूप), भगवान शिव, गणेश जी और कार्तिकेय जी को अर्पित की जाती है। दिन के अंत में चंद्र देव की भी पूजा होती है, और छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
वायना (या बायना) मिठाई, मेवे, नारियल और कभी-कभी कपड़े या धन से सजी एक थाली है, जो व्रत रखने वाली महिला अपनी सास या घर की बड़ी महिला को सम्मान और आभार के रूप में देती है।