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📅शुरू: 8 अक्टूबर 2026 • 2 दिन बाकी
नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा को समर्पित नौ रातों का पर्व है, जिसे पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। इसकी शुरुआत घटस्थापना से होती है, फिर नित्य पूजा, जवारे और व्रत चलते हैं, और अंत में कन्या पूजन व हवन के साथ यह पर्व सम्पन्न होता है। पहले दिन की कलश स्थापना से लेकर निरंतर जलने वाली अखंड ज्योति, व्रत रखने वालों के लिए भोजन सामग्री, और अंतिम दिनों के कन्या पूजन व हवन तक — तैयारी में वाकई बहुत कुछ शामिल है। हमने यह सम्पूर्ण नवरात्रि पूजा सामग्री चेकलिस्ट तैयार की है, जो नौ दिनों में हर सामग्री की ज़रूरत के हिसाब से व्यवस्थित है, ताकि कुछ भी न छूटे। नीचे दिए लिंक्स से कीमतें देखें और सामान पहले से ही ऑर्डर कर लें। ***इस सूची में दिया गया आइटम मात्र संदर्भ के लिए है, कृपया एक बार अपने घर की पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार ही पूजा की तैयारी करें।***
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना और नौ दिनों की नित्य पूजा के लिए ज़रूरी सारी सामग्री। Check items →
अष्टमी/नवमी के कन्या पूजन और नवरात्रि के समापन हवन के लिए सामग्री। Check items →
नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत में उपयोग होने वाले मान्य आटे, नमक और अन्य ज़रूरी सामग्री। Check items →
• जरूरत का सामान चुनकर अपनी व्यक्तिगत लिस्ट तैयार करें। • जरूरत के अनुसार उपलब्ध फ़िल्टर का उपयोग करके सामान आसानी से खोज सकते हैं। • मात्रा, यूनिट और उपलब्ध होने पर पसंदीदा ब्रांड अपनी जरूरत के अनुसार चुनें। • पूरी लिस्ट को कभी भी देखें, अपडेट करें और जरूरी सामान छूटने से बचें। • लिस्ट को परिवार के सदस्यों या दुकानदार के साथ आसानी से साझा करें। • इस पेज के नीचे उपलब्ध FAQs और संबंधित लिस्ट भी देख सकते हैं।
क्या इस लिस्ट से आपको अपनी तैयारी में कुछ मदद मिली?
घटस्थापना के लिए कलश (तांबे या पीतल का पात्र), नारियल (जटा सहित), आम के पत्ते, मोली धागा, अक्षत, छोटा कपड़ा और अगर जवारे भी बोने हों तो मिट्टी व जौ के बीज चाहिए। एक तैयार कलश स्थापना किट में यह अधिकांश सामान एक साथ मिल जाता है।
जवारे जौ के अंकुर हैं, जिन्हें नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी से भरे पात्र में बोया जाता है। नौ दिनों में ये बीज हरे अंकुर के रूप में उगते हैं, जो वृद्धि, समृद्धि और देवी की उपस्थिति के प्रतीक माने जाते हैं। पात्र को कलश के पास रखकर रोज़ पानी दिया जाता है।
नवरात्रि व्रत में आमतौर पर कुट्टू के आटे, सिंघाड़े के आटे, साबूदाना और सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक से बने व्यंजन खाए जाते हैं। फल, दूध से बनी चीज़ें और मेवे भी खाए जाते हैं, जबकि गेहूं-चावल जैसे अनाज और प्याज़-लहसुन आमतौर पर वर्जित होते हैं।
कन्या पूजन नौ छोटी कन्याओं की पूजा है, जिन्हें देवी का जीवंत स्वरूप माना जाता है — यह आमतौर पर अष्टमी या नवमी, यानी नवरात्रि के आठवें या नौवें दिन किया जाता है। कन्याओं को चुनरी, बिंदी और चूड़ियां अर्पित की जाती हैं, हलवा-पूरी-चने का प्रसाद खिलाया जाता है, और सम्मान स्वरूप पैर छूकर दक्षिणा दी जाती है।